Thursday, September 7, 2017
आंत्रप्रेन्योर में ये पांच खूबियाँ होनी आवश्यक है !
जीवन में सफलता और असफलता व्यक्ति के दृढ़ संकल्प पर निर्भर करती है ! स्टीव जाब्स ने कहा था - सफल और असफल आंत्रप्रेन्योर में सबसे बड़ा फर्क होता है -व्यक्ति में दृढ़ निश्चय का होना और नहीं होना ! ये दृढ़ निश्चय ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य की ओर ले जाता है ! ये दृढ़ निश्चय वाले लोग इस तरह कम करते है ! हर मिनिट का भरपूर उपयोग करते हैं -ये लोग अच्छी तरह से समझते हैं कि पहले प्राथमिकता के हिसाब से कौन सा काम करना है ! ये प्राथमिकताओं को लिखकर रखते हैं ,और उसी के अनुसार दिनचर्या निर्धारित करते हैं ! नये प्रयोग करते हैं - ये लोग नये प्रयोग करने से डरते नहीं हैं ! ये हमेशा ट्रेंड पर नजर रखते हैं कि क्या नया चल रहा है ! आगे लोगों की या बाजार की क्या मांग होगी या होने वाली है ! उसी को ध्यान में रखकर नये -नये प्रयोग करते रहते हैं ! लक्ष्य तय जरुर करते हैं - सफल आंत्रप्रेन्योर पहले एक स्पेसिफिक गोल जरुर तय करते हैं ! इसके लिए वे एक योजना तैयार करते हैं -एक महिना ,एक साल ,पांच साल , और एक हर माह की अलग से प्लानिंग ! अपना ज्ञान और सामर्थ्य बढाते रहते हैं -आगे क्या स्थितियां सामने आने वाली है इसका पहले से ही अनुमान लगाने में माहिर और सक्षम होते हैं !इनका एक ही मकसद होता है खुद को सफल होते हुए देखना !इससे इनको ताकत मिलती है ! स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहते हैं -ये लोग हर स्थिति के लिए तैयार रहना जानते हैं ! सुबह जल्दी उठाना , सुबह-शाम अनिवार्य रूप से घूमना, योग और एक्सरसाइज जरुर करते हैं !
Monday, September 4, 2017
सफलता केवल सुपात्र को ही चुनती है !
सफलता केवल सुपात्र को ही चुनती है ! सफलता यूँ ही लोगों को बैठे बिठाये अनायास ही नहीं मिल जाती ! दरअसल सफलताएँ भी योग्य और सुपात्र लोगों का आखिर तक पीछा करती हैं और उन्हें ही चुनती हैं ! दुनिया चाहे किसी योग्य व्यक्ति की प्रतिभा और मेघा को भले ही न पहचान पाए ,पर उसे सफल होने से कोई भी बाधा, या मुश्किल रोक नहीं सकती ! नेपोलिन हिल कहते हैं कि- "असफलता दरअसल आपको बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने का प्रकृति का अपना तरीका है ! " गौतम बुद्ध भी कहते हैं कि -"जो आप अच्छी तरह से जानते हैं , उसके प्रति ईमानदार न होना ही जीवन की एकमात्र विफलता है !" दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं , एक वो लोग होते हैं जो छोटी सी असफलता पर संघर्ष छोड़ देते हैं , और हार को ही अपनी किस्मत मान बैठते हैं ! और दुसरे वो लोग होते हैं ,जो असफलता -या अपनी पराजय को एक चुनौती की तरह लेते हैं और उसे वैसे ही स्वीकार करते हैं ,तथा अपने लक्ष्य को पाने तक न हार मानते हैं न पीछे हटते हैं ! इस दुनिया में खुश रहने या सफल होने के लिए आपको सचमुच खुद से बेइन्तहा प्यार करना होगा ! बिल कासबी कहते हैं कि-"मुझे सफलता का मन्त्र नहीं पता ,पर सभी को खुश करने का प्रयास करना ही असफलता है !"
Thursday, August 24, 2017
महा लक्ष्मी के 21 मंत्र
महालक्ष्मी के ये सभी मंत्र चमत्कारिक हैं और लक्ष्मी के विभिन्न रूपों से सम्बन्धित हैं ! दीपावली या किसी शुभ मुहूर्त में इन मन्त्रों का जप कमलगट्ठे की माला ,लालचंदन अथवा स्फटिक की माला से करना चाहिए ! इन मंत्रो का जप करने से महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है ! 1- एकाक्षर बीज मंत्र - !! श्रीं !! 2 -साम्राज्यलक्ष्मी मंत्र - !! सहतरक्लीं हं !! 3- त्रयक्षर श्री मंत्र - !!श्रीं क्लीं श्रीं !! 4- चतुर क्षर लक्ष्मी बीजात्मको मंत्र - !! ऐ श्रीं ह्रीं क्लीं !! 5- चतुर क्षर लक्ष्मी मंत्र - !!ऐ ह्रीं श्रीं क्लीं !! 6 - पञ्चाक्षरी श्री मंत्र - श्रीं क्लीं श्रीं नम : !! 7- नवाक्षर सिद्धि लक्ष्मी मंत्र - !! ॐ ह्रीं हूँ ह्रां ग्रें क्ष्रों क्रो नम : !! 8 -दशाक्षर लक्ष्मी मंत्र -!! नम :कमल वासिन्येस्वाहा !! 9- दशाक्षर श्री लक्ष्मी मंत्र- !! ॐ क्लीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी देव्यै नम:!! 10- एका दशाक्षर सिद्ध लक्ष्मी मंत्र - !! ॐ श्रीं ह्रीं क्लींश्रीं सिद्धल क्ष्म्ये नम :!! 11- एक दशाक्षर लक्ष्मी मंत्र :- !! यौ मौं नौं नम :ऐ श्रीये श्रीं नम : !! 12-द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मन्त्र - !! ऐ ह्रीं श्रीं क्लीं सौं जगत्प्र सुत्यै नम :!! 13- त्र्योंविन्श्त्यक्षर महा लक्ष्मी मन्त्र - !!ॐश्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं ल्क्ष्मिराग च्छागच्छ मम मन्दिरे तिष्ट तिष्ट स्वाहा :!! 14- सप्तविंशत्यक्षर महालक्ष्मी मन्त्र - !! ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मी नम :!! 15-ज्येष्ठालक्ष्मी महामन्त्र - !!ॐ ऐ ह्रीं श्रीं ज्येष्ठाल्क्ष्मी स्वयंभुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नम :!! 16- आधा महालक्ष्मी मंत्र - !!ॐ श्रीं ह्रीं ऐ म्हालक्ष्मे कमलधारिन्ये सिंहवाहिन्ये स्वाहा:!! 17-लक्ष्मी गायत्री मन्त्र - !!ॐ महा देव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्ये च धीमहि ! तन्नो लक्ष्मी :प्रचोदयात!! 18-कीर्ति लक्ष्मी मंत्र - !! ॐ ह्रीं क्रीं त्रे नम:सदोदितानन्द विग्रहायै ह्रीं क्रीं :स्वाहा !! 19-जया लक्ष्मी मंत्र - !!ॐ ह्रीं जयायै नम :अजिताधामावस्थिताये ह्रीं ज्री स्वाहा:!! 20-माया लक्षी मन्त्र - !!ॐ ह्रीं मायायै नम : मोहलक्षावस्थिताये श्रीं मी ह्रीं स्वाहा:!! 21- ज्येष्ठालक्ष्मी गायत्री मंत्र -!! ॐ रक्त ज्येष्ठायै विद्महे, नील ज्येष्ठायै धीमहि ,तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात !! ( नोट - कुछ मात्राओं और बिन्दुओं की अशुद्दियां हो सकती हैं !)
Monday, August 7, 2017
ये छ : बातें ले जाती हैं सफलता की ओर
दोस्तों ! जीवन में ये छ : बातें ही ले जाती हैं बड़ी सफलता की ओर ! दोस्तों ! सफल और असफल व्यक्ति में फर्क केवल दृढ़निश्चय का होना और नहीं होना ही होता है ! ये दृढ़ निश्चय ही वह महान शक्ति है जो व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक ले जाती है ! ये दृढ़ निश्चय हमारी सोच से आता है ! अपनी सोच के अनुसार ही व्यक्ति का निर्माण होता है ! दुनिया बदल जाती है ,हमारा जीवन वैसा ही रहता है जैसा हम इसके बारे में सोचते हैं ! --मार्क्स आरेलियस ! किस्मत हर आदमी के दरवाजे पर दस्तक देती ही है ,लेकिन जब वह देखती है कि उसकी अगुआई के लिए कोई तैयार ही नहीं है तो वह दरवाजे पर दस्तक देकर वापस लौट जाती है ! -स्तक चार्ल्स लुईस डे सेकंडेट ये दृढ़ संकल्प क्या है ? इस दृढ़ संकल्प से बड़ी सफलता पाने के ये हैं छ : तरीके ---- 1-हर मिनिट का पूरा उपयोग करें -- जरुरत या वरीयता के आधार पर काम का चुनाव करें !अपनी प्राथमिकताओं को पहले दिन ही अपनी डायरी में लिखकर रखें ! इसी के अनुसार अपनी रोज की दिनचर्या को निर्धारित करें ! 2- नये प्रयोग करने से नहीं डरें - नये प्रयोग करने से जरा भी नहीं घबराएँ ! नये प्रयोग करने के लिए पहले एक एक्शन प्लान बनाएं ! बाजार और दुनिया के ट्रेंड पर पूरी नजर रखें ! क्या नया चल रहा है, और आगे क्या मांग होगी ? इस नये रिसर्च के अनुसार ही प्रयोग के करें ! 3 - लक्ष्य तय जरुर करें - अपना कोई न कोई स्पेसिफिक लक्ष्य तय करने वाले लोग ही बड़ी सफलता पाते हैं ! अपने लक्ष्य के अनुसार एक्शन स्टेप बनाएं ! जैसे -एक महिना , एक साल ,पञ्च साल , और हर महीने की पूरी प्लानिंग ! 4 - अपनी क्षमता और सामर्थ्य बढ़ाएं - जीवन में अपनी क्षमता और सामर्थ्य बढ़ाएं !आगे क्या स्थितियां सामने आएँगी इसका अनुमान लगाने में माहिर होना होगा ! खुद को सफल होते हुए देखने के सपने देखना आना चाहिए ! इससे ताकत मिलती है ! 5 - स्वस्थ रहें - जीवन में स्वस्थ रहना जरुरी है ! स्वस्थ रहने के लिए एक एक्शन प्लान बनाना जरुरी है ! सुबह दिन उगने से पहले उठें ! एक्सरसाइज करें ! सुबह -शाम घूमें ! रोज पांच किलोमीटर पैदल चलें ! 6 -सफल होने का संकल्प लें - सबसे जरूरी है संकल्प लेना ! संकल्प लेने वाले लोग असफल होने पर कभी हार नहीं मानते ! वे सदा प्रयास करते रहते हैं ! उनका एक एक्शन प्लान होता है पूरा अध्ययन करना ! वे जानते हैं सफलता मिलकर रहेगी !
Thursday, June 29, 2017
जानें इन चार के बारे में - चाणक्य नीति से
अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम ! दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्ध- स्य तरुणी विषम !!(4-15) भावार्थ - अभ्यास न करने पर शास्त्र विष के समान हो जाता है ! अजीर्ण में भोजन विष का काम करता है ! निर्धन के लिए सभाएं विष होती हैं !वृद्ध के लिए युवती विष के समान है ! त्यजेधर्मं दयाहीनं विधाहीनं गुरुंत्यजेत ! त्यजेत्क्रोधमुर्खी भार्या नि :स्नेहान बांध वानस्त्यजेत !! ( 4-16) भावार्थ - प्रीतिहीन समाज, दया रहित धर्म , विधा रहित गुरु का त्याग उचित है ! जो स्त्री क्रोध प्रकट करती हो , उसको भी त्याग देना चाहिए ! ना$स्ति कामसमो व्याधिर्ना$स्ति मोहसमो रिपु :! ना$स्ति कोपसमो वहिनरना$स्ति ज्ञानात परं सुखम !! (5-12) भावार्थ - कामवासना के समान कोई रोग नहीं है , मोह के समान कोई शत्रु नहीं है , कोप के समान कोई आग नहीं है तथा आत्मज्ञान से बड़ा कोई सुख नहीं है ! ऋण कर्ता पिता शत्रु माता च व्यभिचारिणी ! भार्या रूपवती शत्रु : पुत्र शत्रुर्पंडित !! (6-10) भावार्थ - ऋण करने वाले पिता और व्यभिचारिणी माता शत्रु के समान हैं ! मुर्ख पुत्र और अधिक सुंदर स्त्री भी शत्रु के समान ही होते हैं !
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Tuesday, June 27, 2017
महान कूटनितिज्ञ और विद्वान आचार्य चाणक्य की नीतियाँ
स्वर्गस्थितानामहि जीवलोक, चत्वारि चिन्हानी वसन्ति देहे ! दान प्रसंगो मधुरा च वाणी , देवा $र्चनं ब्राह्मणतर्पण च !! (7-16) भावार्थ :- " दान देने में रूचि , मधुर वाणी , देवताओं की पूजा तथा ब्राह्मणों को संतुष्ट रखना - इन चारों लक्षणों वाला व्यक्ति इस लोक में कोई स्वर्ग की आत्मा ही होता है ! हतं ज्ञानं क्रियाहीनं, हत्श्चा $ज्ञानतो नर:! हतं निर्नायकं सैन्यं , स्त्रियों नष्टा ह्यभतृका !! (8-8) भावार्थ :- "जिस ज्ञान पर आचरण न किया जाये ,वह ज्ञान नष्ट हो जाता है ! अज्ञान से मनुष्य का नाश हो जाता है ! सेनापति के बिना सेना तथा बिना पति के स्त्री नष्ट हो जाती है !
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