Friday, April 7, 2017
Thursday, April 6, 2017
हरड
आयुर्वेद में हरड को हरीतकी , यानि मनुष्य की माता के समान हित करने वाली बताया गया है ! इसे अमृतोपम औषधि मानते हुए पथ्या,अभय आदि नाम से भी पुकारा जाता है ! हरड की मूल उत्पति -स्थली गंगा तट है ! यहीं से यह सारे विश्व में फैली है ! यह 50 फीट ऊँचा वृक्ष होता है जो सारे भारत वर्ष में पूर्व से पश्चिम तक 5000 फीट की ऊंचाई तक पाया जाता है ! इसकी छाल भूरे रंग की , फूल छोटे पीताभ सफेद मंजरी में तथा फल 1 से 2 इंच लम्बे अंडाकार होते हैं ! इसके कच्चे फल हरे व पकने पर पीले धूमिल हो जाते हैं ! फल शीतकाल में लगते हैं जिन्हें जनवरी से अप्रैल महीने के मध्य संग्रह करते हैं ! बड़ी व छोटी हरड में से छोटी हरड को अधिक निरापद व सौम्य प्रभाव डालने वाली माना जाता है ! हरड के फल में टैनिन रूप में सक्रिय संघटक चेबुलेजिक एसिड , चेबुलिनिक एसिड व गेलिक एसिड पाया जाता है ! एन्थ्राक्विनिन जाति के गलाईकोसाइड रेचक क्रिया में प्रमुख भूमिका निभाते हैं ! हरड त्रिदोष जन्य विकारों में प्रयुक्त होती है ! इसे लवण के साथ कफज , शक्कर के साथ पित्तज एवं धृत के साथ वातज विकारों में देते हैं ! हरड का टैनिन अम्ल आँतों की श्लेष्मा झिल्लियों पर ऐसा अनुकूल प्रभाव डालता है ताकि उसके मल भाग की रक्षा हो सके ! आंतो को संकुचित कर यह रस स्त्राव को कम करता है ! ग्राही प्रभाव के साथ -साथ इसका प्रमुख गुण रेचक है ! यह पुरानी कब्ज की जीर्ण आँतों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए तुरंत लाभ दिखाता है ! इसका जीवाणुनाशी प्रभाव बाह्यरोगाणुओं को नष्ट करने व दुर्गन्ध मिटने के रूप में होता है ! हरड मूलतः वात- शामक होने के कारण नाड़ियों को बलवान बनाती है ! तथा अंतर्कोशीय शोथ मिटाती है ! यह कृमि रोगों , बवासीर , संग्रहणी आदि रोगों में लाभ पहुंचा कर सात्मिकरण की स्थिति लाती है ! यह पित्त को कम करती है ! आमाशय को व्यवस्थित तथा फुले बवासीर के मस्सों की सूजन कम करती है ! इससे पीलिया ,अग्निमन्द्ता , यकृत्प्लिहा वृद्धि में भी बड़ा फायदा होता है ! हरड का फल ही काम में आता है ! छाया में सुखाये फलों के चूर्ण को एक से तीन साल तक प्रयुक्त किया जा सकता है ! बवासीर एवं खूनी पेचिश में हरड के चूर्ण को दही या मठ्ठे के साथ लेते हैं ! मस्सों की सूजन कम करने के लिए हरड क्वाथ का एनिमा भी लिया जाता है ! गेस्ट्राइटीस में मुंह में रखकर चबाकर ,कब्ज में चूर्ण के रूप में तथा त्रिदोष विकारों में भूनकर लेते हैं !
पेड़ -पौधे भी हैं सुख -सौभाग्य और समृद्धिकारक
* भारत के घर -घर में तुलसी का पौधा भारतीय और हिंदुत्व की पहचान है ! भारतीयों के लिए तुलसी मोक्षदायनी कवच है ! तुलसी घर की लक्ष्मी है ! तुलसी के पौधे से कुलदेवता प्रसन्न रहते हैं ! तुलसी में तीनों देवता - ब्रह्मा , विष्णु , महेश तथा तीनों देवियाँ - महालक्ष्मी , महाकाली और महासरस्वती का वास होता है ! * - तुलसी का पौधा कब लगायें - वैसे तो तुलसी का पौधा कभी भी घर में लगा सकते हैं , इसकी कृपा घर के सभी लोगों पर सदा बनी रहती है ! लेकिन विशेष लाभ लेने एवं अपार धन -संपदा पाने के लिए तुलसी का पौधा देठउठनी एकादशी को घर की छत पर ईशान कोण ( पूर्व -उत्तर ) में शुभ घड़ी के चौघड़िये में मिट्ठी के गमले में लगायें ! तुलसी के पौधे को प्रतिदिन प्रात: काल स्वच्छ जल से सींचें और सुबह-शाम घी का दीपक जलाएं ! * राशियों के अनुसार घर में पौधे लगायें ! ये शीघ्र एवं विशेष फल देते हैं ! 1 मेष - मनीप्लांट , रातरानी या अशोक ! 2 वृष - तुलसी , दूब , अमरुद ! 3 मिथुन - केल , तुलसी , चंपा ! 4 कर्क - चांदनी , अशोक , गुलाब ! 5 सिंह - रातरानी , तुलसी , मोलश्री , कस्तैला ! 6 कन्या - मनीप्लांट , तुलसी ,अमरबेल (मधुमालती ) ! 7 तुला -तुलसी ,चांदनी ,अमरुद , गुलाब , दूब ! 8 वृशिचक - अमरबेल , केल , अशोक ,मीठी नीम ! 9 धनु - तुलसी ,नागचंपा ,केल ! 10 मकर -तुलसी ,गेंदा , मरवा ,मोगरा ! 11 कुम्भ - रातरानी ,तुलसी ,दूब,नीम गिलोय की बेल! 12 मीन -तुलसी ,अशोक , केल,अमरुद ,मीठी नीम !
Wednesday, April 5, 2017
भाई और पानी को मिलते देर नहीं लगती
किसी गाँव में दो भाई रहते थे ! दोनों भाइयों में बड़ा अच्छा प्रेम था ! दोनों मिलकर खेती -बाडी करते थे !खेती - बाडी से जो भी कमाई होती थी उसे वे आधी - आधी बाँट लेते थे ! जिन्दगी बड़ी अच्छी तरह से गुजर रही थी ! एक बार किसी बात को लेकर दोनों में झगडा हो गया ! दोनों में आपसी खींचातान बढ़ गई ! दोनों के मन में स्वार्थ पैदा हो गया ! बड़े भाई ने आधे खेत पर अपना कब्जा कर लिया और खेत के बीचों - बीच एक खाई भी खुदवा दी , ताकि छोटा भाई उसके खेत में न आ सके ! खेत के बीच खाई देखकर छोटे भाई को बहुत गुस्सा आया ! और उसने भी बदला लेने के लिए कारीगर को बुलाकर खेत के अपने हिस्से के किनारे -किनारे ऊँची -ऊँची बाड बनाने को कहा ताकि वह अपने भाई का चेहरा भी नहीं देख सके ! कारीगर को पैसे देकर कहा कि तुरंत काम शुरू कर दो ! कारीगर ने कहा कि अगले दिन तक काम पूरा हो जायेगा ! अगली सुबह जब छोटा भाई अपने खेत पर गया तो हैरान रह गया ! वहां कोई बाड नहीं थी बल्कि उसकी जगह खाई पर लकड़ी का एक पुल बना हुआ था ! यह देखकर छोटा भाई आग बबूला हो गया ! वह कारीगर को बुलाकर डांटने वाला ही था कि तभी बड़ा भाई वहां आ गया और बोला कि मैंने तुम्हारे साथ बुरा किया फिर भी तुमने मुझसे भाई का रिश्ता नहीं तोडा ,और खाई पर पुल बनवा दिया ? मेरे भाई मुझसे स्वार्थ वश गलती हो गई ! मैं इसके लिए तुझसे माफ़ी मांगता हूँ ! मुझे माफ़ कर दे ! अब हम यह खाई पाट देंगे और पहले की तरह ही फिर से मिलकर खेती करेंगे और मिलकर प्रेम -प्यार से रहेंगे ! छोटे भाई ने भी हाथ जोड़ कर कहा भाई मैं भी स्वार्थ और इर्ष्या में पागल हो गया था ! मुझे भी माफ़ कर दो ! दोनों भाई आपस में गले मिले और फिर से प्रेम से रहते हुए मिलकर खेती करने लग गये ! सच है - थोड़ी सी समझदारी से रिश्तों की कडवाहट को पूरी तरह से मिटाया जा सकता है ! यह भी सच है की भाई और पानी को मिलते देर नहीं लगती !
घर परिवार में खुशियों के लिए ये करें
यह संसार पञ्च तत्वों से मिलकर बना है ! पृथ्वी , आकाश , जल , वायु और अग्नि ! ये सारे 9 ग्रह , 12 राशियाँ , और नक्षत्र , प्राणी एवं घर सभी इनके आधार पर ही संचालित होते हैं ! अत : मनुष्य प्रतिदिन कुछ साधारण कार्य करके भी घर - परिवार में खुशियाँ ला सकता है ! * - घर में तुलसी का पौधा लगायें ! प्रतिदिन इसमें सुबह-शाम एक घी का दीपक जलाएं ! इससे घर का वास्तु दोष संतुलित रहता है ! तथा बुध , चन्द्र व आंशिक शुक्र ग्रह शांत रहते हैं ! घर की छत पर ईशान कोण में तुलसी का पौधा रखें और नित्य प्रति जल चढ़ाएं ! इससे मंगल व आंशिक सूर्य ग्रह भी शांत व प्रसन्न रहते हैं ! * - हमेशा मिटटी के जलपात्र (मटकी , घडा ,सुराही आदि ) का ही जल पीयें ! इससे शनि , राहु और केतु ग्रह शांत होते हैं ! * - परिवार में शयन कक्ष को हमेशा स्वच्छ व सुगन्धित रखें ! लकड़ी के बने पलंग पर ही शयन करें , तथा पलंग के पायों के नीचे तांबे की प्लेट रखें ! इससे बुध , शुक्र व आंशिक केतु ग्रह शांत व प्रसन्न रहते हैं तथा घर -परिवार से रोग -दोष दूर होते हैं ! * - घर की छत पर अग्नि कोण में लाल , पीली ,नीली ,सफेद व हरी पचरंगी पताका फहरायें ! इससे सूर्य व गुरु ग्रह ही नहीं बल्कि सभी नवग्रह शांत व प्रसन्न होते हैं ! तथा समस्त पीडाकारक रोग -दोषों का निवारण होता है ! * - यदि आपकी रसोई अग्नि कोण में नहीं हैं तो रसोई के ईशान कोण में सिंदूरी रंग के गणपति स्थापित करें ! ऐसा करने से घर में सदा धन -धान्य की बहार बनी रहेगी और दुर्घटनाओं का खतरा नहीं रहेगा ! * - पितृ दोष निवारण के लिए बुजुर्गों की प्रसन्नता के लिए और घर में शांति , नौकरी - कारोबार आदि में उन्नति के लिए प्रतिदिन प्रात:कालऔर सांयकाल घर के पराणडे के पास घी का दीपक जलाएं !
Saturday, April 1, 2017
मन की सुनने और करने से होती है जीवन की समस्यायें हल
* - यदि तुम्हारा हृदय पवित्र है तो तुम्हारा आचरण भी सुंदर होगा ! यदि आचरण सुंदर है तो तुम्हारे घर में शांति रहेगी !यदि घर में शांति है तो राष्ट्र में सुव्यवस्था रहेगी ! और यदि राष्ट्र में सुव्यवस्था है तो समस्त विश्व में शांति और सुख रहेगा ! - कन्फ्यूशियस अक्सर लोग अपनी गलतियाँ छिपाने के लिए तरह-तरह के बनाते रहते हैं ! दरअसल हमें अपनी कमजोरियों की पहचान करनी आनी चाहिए , उनसे बचने के बहाने नहीं ! बिना कोशिश हम गलतियों को कभी भी दूर नहीं कर सकते ! अगर हम अपने हर काम का आंकलन -मुल्यांकन पहले से करें तो यह तय है कि कोई भी गलत कदम उठेगा ही नहीं ! अक्सर लोग अपनी गलतियों , अपनी असफलताओं या प्रतिकूल परिस्थितियों में दूसरों को दोष देकर , भाग्य के माथे सब कुछ मढ़कर बच निकलने का आसन रास्ता खोजने की कोशिश करते हैं ! पर हकीकत इसके विपरीत है की असफलताओं , और गलतियों से मिली सीख ही व्यक्ति की सबसे अच्छी दोस्त होती है ! अगर जीवन में असफलता न हों तो सफलता के अर्थ और महत्व ही खत्म हो जायेंगे !अक्सर यह भी बताया जाता है किअपने मन की बात दोस्तों से , अपने परिजनों से जरुर करें , उन्हें बताएं तो मन को बहुत शांति मिलेगी ! अपनों से बातचीत करने से कोई न कोई रास्ता जरुर निकलता है ! लेकिन अपनी समस्याओं का हल स्वयं को ही खोजना पड़ता है ! अपनी समस्याओं का हल दूसरा और कोई नहीं बताता ! हाँ ! दूसरे लोग सलाह दे सकते हैं , किसी अच्छे रास्ते की और इंगित कर सकते हैं ! मगर चलना स्वयं को ही पड़ता है ! कई बार गुस्से में हम किसी को ऐसी बात कह जाते हैं जो नहीं कहनी चाहिए थी ! बाद में हमें उस बात का पछतावा भी होता है ! कोई अच्छा सम्बन्ध एक क्षण में ही खत्म हो जाता है ! एक अच्छा सम्बन्ध जिसे बनाने में हमें पूरा जीवन लग जाता है , वह पल भर में ही खत्म हो जाता है ! अगर गुस्सा करने से पहले थोडा शांति से विचार कर लिया होता तो गुस्सा आता ही नहीं ! दोस्तों ! अगर आप अपने मन की सुनेंगे , खुद से बात करेंगे , तो अपने को भी पहचानेंगे और दूसरों को भी ! हमारा मन ही तो है ,जो हमें दुनिया को पहचानने का परखने का धैर्य देता है ! इसीलिए जरूरी है कि सुनें सबकी और करें अपने मन की !
विवेक और बुद्धि से सोचो और कर्म करो
एक पुरानी बात है ! एक बार महात्मा बुद्ध एक गाँव में अपने एक भक्त के घर गये ! वह भक्त एक किसान था ! महात्मा बुद्ध को देखकर वह किसान बहुत प्रसन्न हुआ और उनके प्रवचन का आयोजन करने इच्छा जाहिर की ! महात्मा बुद्ध ने भी ख़ुशी- ख़ुशी प्रवचन करने की स्वीकृति दे दी ! शाम को महात्मा जी के प्रवचन सुनने गाँव के सभी लोग उस किसान के घर आये ! महात्मा बुद्ध का प्रवचन हो रहा था पर वहां वह किसान कहीं पर नजर नहीं आ रहा था ! गाँव के लोगों में कानाफूसी होने लगी कि कैसा भक्त है ! महात्मा जी के प्रवचन का आयोजन करके स्वयं नदारद हो गया ? प्रवचन खत्म होने पर सभी लोग अपने अपने घर चले गये ! आधी रात को किसान जब अपने घर लौटा तो महात्मा बुद्ध ने पूछा कि - " भक्त तुम कहाँ चले गये थे ? गाँव के सभी लोग तुम्हारे लिए पूछ रहे थे !" किसान ने कहा , " महात्मा जी दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्था हो गई थी , पर तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो गया ! जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी , तो तुरंत मुझे उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ गया ! अगर मैं उसे चिकित्सक के पास नहीं ले जाता तो उसका बचना मुश्किल था ! आपका प्रवचन तो मैं बाद में भी सुन लूँगा !" दुसरे दिन सुबह कई लोग महात्मा जी के पास आये और उस किसान की शिकायत करते हुए कहने लगे कि , " महात्मा जी यह व्यक्ति तो आपका भक्त होने का झुन्ठा दिखावा करता है ! प्रवचन का आयोजन करके स्वयं ही गायब हो जाता है !" महात्मा बुद्ध ने उन लोगों को सारी घटना कह सुनाई और फिर उनको समझाया कि , "मेरे भक्त ने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व दिया है ! उसने यह सिद्ध कर दिया है कि उसने मेरी शिक्षा को बिल्कुल ठीक ढंग से समझ लिया है ! अब उसे मेरे प्रवचन सुनने की आवश्यकता नहीं रह गई है ! मैं आप लोगों को यही तो समझता हूँ कि अपने विवेक और बुद्धि से सोचो और अपना कर्म करो कि कौन सा काम पहले जरूरी है ! अगर मेरा यह भक्त अपने बीमार बैल को छोडकर मेरा प्रवचन सुनने लग जाता तो हो सकता है इसका बैल मर जाता ! अगर इसका बैल मर जाता तो मेरा प्रवचन देना ही व्यर्थ हो जाता ! मेरे प्रवचनों का सार यही तो है कि सब कुछ त्यागकर भी जीव मात्र की रक्षा करो ! महात्मा बुद्ध के प्रवचन सुनकर सभी गाँव वालों ने भी प्रवचनों का असली भाव समझ लिया !
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